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Jaipur Cardiology

Dr.Rudradev pandey DM (Cardiology) ,FACC Senior consultant cardiology, Specialist in treating all types of blockages in Heart , Legs , Brain using all technology like FFR,IVUS, Rotational Atherectomy. Device Closure of Holes in Heart pacemaker,ICD

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							हार्ट फ़ेल्यर
हार्ट फ़ेल्यर क्या होता है? नाम से तो प्रतीत होता है कि मरीज़ का हार्ट फैल हो गया है और अब कुछ नहीं हो सकता। लेकिन ऐसा है नहीं हार्ट फ़ेल्यर का मतलब है मरीज़ का दिल अपनी पूरी ताक़त से काम नहीं कर पा रहा है और उसे सहायता की ज़रूरत है जिससे कि वो और ख़राब ना हो। मनुष्य के शरीर मैं हार्ट का काम पूरे शरीर को ऑक्सिजन, भोजन पहचाना है, जिससे कि बाक़ी ऑर्गंज़ ज़ैसे किड्नी, ब्रेन, आँ त अपना काम सही ढंग से कर सके, नोर्मल हार्ट कितना पम्प करता है और हार्ट फ़ेल्यर कब कहते है ? नोर्मल हार्ट ६०-७० % ब्लड बाहर पम्प करता है १००% नहीं, यदि हार्ट की पम्पिंग कपैसिटी ४०% से कम है तो हार्टफ़ेल्यर कहते है औरे उसे सपोर्ट की ज़रूरत होती है, जितना ज़्यादा वीक पम्प होता है उतना ज़्यादा हॉस्पिटल माई अड्मिशन & म्रत्यु का ख़तरा भड़ता ज्यता है । कितनी बड़ी है ये प्रॉब्लम? विश्व माई हार्ट फ़ेल्यर के मरीज़ ताज़ी से भाड़ रहे है मुख्य कारण १- सम्भावित आयु का भाड़ना २- हार्ट अट्टकक के मरीज़ों की मरत्यूदर माई कमी ३- रिस्क फ़ैक्टर्ज़ का भाड़ना/भारतीय डाँटा बहुत काम है पर विश्व की १६ % जनसंख्या भारत मैं रहती है, २५% हार्ट पेशंट्स भारत मैं है और २०२० तक हार्ट के सबसे ज़्यादा रोगी भारत मैं हो जयंगे, भारत ज़ैसे विकासहशील देशों मैं हार्ट फ़ेल्यर तेज़ी से भाड़ रहा है क्यूँकि पुराने रिस्क फ़ैक्टर जैसे RHD, तम्बाकू सेव न अभी भी है और आधुनिक जीवन शैली के रिस्क फ़ैक्टर ज़ैसे मोटापा , ब्लड प्रेशर, डाइअबीटीज़ , हार्ट अटैक ताज़ी से भाड़ रहे है, इसका मतलब ये है की हम विकसित देशों की तुलना मैं इस बीमारी के ज़्यादा रिस्क पर है, यदि हार्ट फ़ेल्यर वाला मरीज़ को लक्षण जैसे बैठे बैठे सास भरने लगे हे तो अगले ५ साल माई उसकी म्रत्यु दर लगभग ४२ % है। लैन्सेट के नामी जर्नल मैं प्रकाशित एक स्टडी मैं पाया गया कि विकासशील देशों मैं हार्ट फ़ेल्यर जवान मरीज़ों मैं ज़्यादा हो रहा है, इन हॉस्पिटल मरत्यूदर विकसित दशों मैं ३-४% है जबकि विकासशील देश जैसे भारत मैं ३४% । डिस्चार्ज पेशंट की ६ महाने माई म्रत्यु दर विकसित दशों मैं ३% जबकि विकासशील दशों मैं ३० % है। कई ट्राइयल से ये निस्कर्ष निकलता है की विकसित देशों मैं आने वाले समय मैं हार्ट फ़ेल्यर के पेशंट्स और तेज़ी से भड़ेंगे । हम भारतियों को ज़्यादा ख़तरा क्यूँ है जैसा कि बताया भारत मैं हेल्थ इन्फ़्रस्ट्रक्चर और पब्लिक जागरूकता बहुत काम है और रिस्क फ़ैक्टर्ज़ बहुत ज़्यादा है और इसलिए हार्ट फ़ेल्यर के मरीज़ भाड़ भी रहे है औरे हॉस्पिटल मैं और डिस्चार्ज बाद म्रत्यु दोनो भी भाड़ रहे है होता क्यूँ है हार्ट फ़ेल्यर वैसे तो कई करन होते है हार्ट के काम काम करने के पर मुख़्ताया हार्ट अटैक, RHD, वाल्व प्राब्लम्ज़, ब्लड प्रेशर साँस की बीमारी, मोटापा , शराब का सवेन मुख्य वजह है हार्ट फ़ेल्यर लक्षण क्या होते है साँस भरना ( चलने मैं/ बैठे बैठे) , जल्दी थक जाना, अनियमित धड़कन, पेरों माई सूजन आना, रात को ख़ासी आना गुलाबी कॉफ़ आना, भूख कम लगना, आचानक वज़न भाड़ जाना, रात को बारबार पेशाब लगना, हार्ट फ़ेल्यर मरीज़ की दिनचर्या और खान पान क्या होना चा हिए? सब से पहले तो डॉक्टर की सलाह को पूरा पालन करो, , नामक काम खाओ, नोर्मल आदमी ६ ग़म नामक खाता है रोज़ाना, जितना ज़्यादा पम्प कमजूर है उतन काम नामक खाना है, २०-४० % पम्प कपैसिटी है तो २ gm/day, २० से कम है तो gm/day। पानी ओर तरल पदार्थ का सावन काम करो १५०० -२००० ml/day गरमी मैं और १२००-१५०० ml/day सर्दी मैं। ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक की दावा टाइम पर डॉक्टर की सलाह से लाते रहे, नियमित किड्नी और लिवर फ़ंक्शन की जाँच करवाते रहे क्यूँकि हार्ट फ़ेल्यर के मर्रेज मैं ब्लड प्रेशर थोड़ा कम रहता है और किड्नी फ़ंक्शन काम होने की सम्भावना ज़्यादा रहती है इसके साथ ही दवाओं का भी किड्नी और लिवर पर प्रभाव होता है। वज़न भी नियमित जाँचते रहे यदि १ मन्थ मैं आचानक वज़न ३-४ kg भाड़ गया हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिले ये हार्ट फ़ेल्यर भाड़ने का संकेत हो सकता है क्या हार्ट की पम्पिंग को भड़ाया जा सकता है? हार्ट यदि एक बार कमजूर हो गया तो पम्पिंग को नहीं भड़ाया जा सकता हाँ यदि दोनो साइड के वेंट्रिकल का सामंजस्य बिगड़ा हुआ है तो CRT - p मशीन से थोड़ा इम्प्रूव्मेंट काइअ जा सकता है, दावा से हार्ट का और कमज़ोर होना थोड़ा काम किया जा सकता है, हार्ट फ़ेल्यर मैं सबसे ज़्यादा म्रत्यु का करन vt यानी हार्ट मैं शॉर्ट सर्किट होना होता है, जितना वीक हार्ट पम्प करता है उतना ही ज़्यादा चैन्सेज़ होते है शॉर्ट सर्किट होने के, दवाओं के अलावा AICD डिवाइस लगाई जाती है मरीज़ को जिससे यदि शॉर्ट सर्किट हो भी जय तो मशीन अपने आप ही उसे पहचान कर झटका डे कर उसे रोक दे, CRT, AICD दोनो हे पेस्मेकर की तरह हे होती है थोड़ा अड्वैन्स्ट वर्ज़न कह सकते है, यदि CRT, AICD , दवाओं के बाव जूट मरीज़ को हार्ट फ़ेल्यर सिम्प्टम्ज़ रहते है और उसे दिनचर्या मैं प्रॉब्लम होरही है तो हार्ट ट्रैन्स्प्लैंट ही लास्ट उपचार होता है, सारांश -यदि समय रहते हम दिल का ख़याल रखते है तो दिल भी हमारा ख़याल रखेगा पर यदि दिल बिगड़ा तो ये जानलेवा भी होसकता है। कमज़ोर दिल के मरीज़ परहेज़, दवा, डिवाइसेज़ के सहारे से नोर्मल ज़िंदगी व्यतीत कर सकते है।
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